मिथ्या क्या है ?
जो लगता है की ये होगा वो होता नहीं है और जो होता है वो लगता नहीं है बस इसके आस पास का एक विचार ही मिथ्या है |
वैसे यहाँ हम शंकराचार्य आदि गुरु के कथन को भी याद कर सकते है। "ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या" । इसका अर्थ है
की केवल ब्रह्म ही सत्य | ये संसार एक मिथ्या है | एक छलावा है या ये भी की इस संसार में कुछ पाने लायक नहीं है एक वस्तु को छोड़कर और वो है ब्रह्म। और ब्रह्म को जाना जाना ही उसे पाना है। ........ क्रमशः

फोटोः इंटरनेट से...
जो लगता है की ये होगा वो होता नहीं है और जो होता है वो लगता नहीं है बस इसके आस पास का एक विचार ही मिथ्या है |
वैसे यहाँ हम शंकराचार्य आदि गुरु के कथन को भी याद कर सकते है। "ब्रह्म सत्य जगत मिथ्या" । इसका अर्थ है
की केवल ब्रह्म ही सत्य | ये संसार एक मिथ्या है | एक छलावा है या ये भी की इस संसार में कुछ पाने लायक नहीं है एक वस्तु को छोड़कर और वो है ब्रह्म। और ब्रह्म को जाना जाना ही उसे पाना है। ........ क्रमशः

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